Sunday, November 10, 2019

राष्ट्र के गौरव मेरे पिताजी श्रद्धेय पिताश्री सेठ गोविन्द दासजी


राष्ट्र के गौरव मेरे पिताजी श्रद्धेय पिताश्री सेठ गोविन्द दासजी

हमारे पिताश्री सेठ गोविंद दासजी का उदात्त जीवन स्वयं में ही उनका परिचय है । वे देश के उन सपूतों में से एक थे जिनकी प्रत्येक सांस देश और समाज को अर्पित हो गयी । जब राष्ट्र के लिये सर्वस्व न्यौछावर करने की घड़ी आयी तो वे अग्रिम पंक्ति मे थे, किंतु सत्ता सुख की तृष्णा से सदैव मुक्त रहे ।


कलम के सिपाही, सिपाही वतन के
कर्म ऐसा, प्रेरणा बने सारे जन के
कहीं थे भ्रमर पुष्प साहित्य के तो
कहीं बागवां इस महकते चमन के

(पद्मा बिनानी द्वारा लिखित 
 संस्मरण  “नर्मदा के तट से”)


No comments:

Post a Comment