इस
देश की वीरांगनाओं में रानी दुर्गावती का नाम अमर है । मातृंभूमि की अस्मिता और भारतीय
नारी के स्वाभिमान की रक्षा हेतु दुश्मनों से युद्ध करती हुई उन्होंने जिस शौर्य
और साहस के साथ अपने प्राणों की आहूति दी थी वह सदैव याद किया जायेगा। रानी
दुर्गावती पर लिखी गयी कविता का एक सम्पादित अंश ।
सौम्य,कोमल
पुष्प सी, पर्वत सी, पर दुर्गम अति,
थरथराते
शुत्र थे, जब थी कभी ललकारती ।
घोर
संकट में कभी हिम्मत न थी जो हारती ।
कुलवधू
वह गोंड़ वंश की, राष्ट्र की वीरांगना,
मुगलों
के मंसूबों को करके ध्वस्त स्वयं हो गई फना ।
(पद्मा बिनानी लिखित पुस्तक- “नर्मदा के तट से”)

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