Wednesday, August 14, 2019

मनुष्‍य की मेधा

एक छोटा सा पैराग्राफ


ज्ञान और अनुभव का संसार विस्‍तीर्ण है। यह माना जाता है कि मनुष्‍य के मस्तिष्‍क का आकार भले ही सीमित हो लेकिन उसकी सीमा अपार होती है। हमारे मस्तिष्‍क में स्‍मृतियों के असंख्य ण्‍ड होते हैं जिनमें सारा जीवन अत्‍यन्‍त सुव्‍यवस्थित तरीके से अवस्थित होता है। उसी मस्तिष्‍क में चलने वाली उथल-पुथल, उस सिलसिलेवार रखी स्‍मृतियों को गड्डमड्ड कर दिया करती हैं लेकिन इसका अर्थ यह नहींं है कि तितर-बितर होने के बाद उनके सन्‍दर्भ ही खो जायें। यह मनुष्‍य की मेधा ही है जो समय-समय पर सभी स्‍मृतियों को, सभी बातों को,सभी घटनाक्रमों को अपने पुनस्‍मर्रण के लिए धरातल पर ले आती है। इस ब्‍लॉग के माध्‍यम से एक आरम्‍भ का प्रयत्‍न है आदरणीया पद्मा बिनानी के जीवन, स्‍मृतियों और गहन अनुभव दृष्टि की अनूठी धरोहरों को साझा करने का। 

इस एक छोटे से अनुच्छेद माध्‍यम से एक परिचय देने और अनेक परिचय प्राप्‍त करने की प्रबल जिज्ञासा के साथ हम मिल रहे हैं। आग्रह यही है कि आप इस रचनात्‍मक और अनुभवसमृद्ध सरोकार का हिस्‍सा बनेंं और हमारे साथ रहें, अपने साथ वालों को भी जोड़ें। एक सद्कामना के साथ हम निरन्‍तर मिलते रहेंगे। 

आपकी दुआऍं, शुभकामनाऍं और संगति हमेशा रहेगी, इसी विश्‍वास के साथ......... 


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